9 दिसंबर 2020 - 17:47
क्या यमन में होगा अमरीका व ईरान में टकराव? रूसी न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट

रूसी न्यूज एजेन्सी स्पूतनिक ने सोमालिया से अमरीकी सैनिकों की वापसी के उद्देश्यों का रोचक जायज़ा लिया है।

ट्रम्प ने वाइट हाउस में अपने अंतिम दिनों में सोमालिया से अमरीकी सैनिकों की वापसी के आदेश दे दिये हैं। सोमालिया में अमरीका के 800 से 1000 सैनिक मौजूद हैं। सोमालिया में तैनात यह अमरीकी सैनिक, अमरीकी सेना की  विशेष टुकड़ी एसओएफ का हिस्सा हैं। अमरीकी वायु सेना के जवान तो सोमालिया में फिलहाल रहेंगे लेकिन नौसेना  के जवानों की अगली मंज़िल जिबूती है, जो यमन से काफी नज़दीक है।

     अमरीका के क़दम के दो मक़सद हैं। एक तो यह कि वह जिबूती में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहता है। चीन ने सन 2017 से इस देश में सैन्य छावनी बना रहा है जो वासतव में चीन की विदेश में सब से पहली छावनी भी है।

     दूसरा मक़सद, यमन में सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखना है।

     यमन का बाबुलमंदन स्ट्रेट, आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बेहद अहम है। इस इलाक़े में 10 से अधिक देशों के सैनिकों  की उपस्थिति और इसके आस पास यानि जिबूती, सोमालिया और एरिट्रिया में अन्य देशों की छावनियां, इस जलमार्ग के महत्व का सुबूत हैं। बाबुलमंदब स्ट्रेट की सब से महत्वपूर्ण घटना, यमन युद्ध है जो सन 2015 में सऊदी अरब के हमले से शुरु हुआ और अब अलकायदा और दाइश जैसे आतंकवादी संगठन भी इस युद्ध का हिस्सा हैं। यह युद्ध बड़ी जल्दी ही धार्मिक युद्ध में बदल गया और अब यमन सऊदी अरब और ईरान के बीच प्रॉक्सी वॉर का अखाड़ा बन चुका है।

     अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट ओ ब्रायन ने नवंबर में फिलिपीन की यात्रा के दौरान कहा था कि यमन के असांरुल्लाह के सामने ईरान से दूर होने का रास्ता खोला गया है अगर उसने यह काम नहीं किया तो अमरीका उन्हें आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में डाल देगा।

     ट्रम्प के दामाद कुशनर की क्षेत्र की यात्रा का एक मक़सद, ईरान को अलग थलग करने के अलावा यमन के दलदल से सऊदी अरब को बाहर निकालना भी है। इस तरह से सोमालिया से अमरीकी सैनिकों को हटा कर यमन के निकट तैनात करने, ईरान पर दबाव बढ़ाने का एलान करने और असांरुल्लाह पर इस तरह से ध्यान देने का मतलब कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हो सकती हैं।

    ट्रम्प की जो मानसिकता है और जिस तरह से दामाद और बेटी के अलावा सलाहकारों का उनके पास अभाव है उसे देखते हुए ट्रम्प की ओर से कोई नया रोमांचकारी क़दम बहुत अधिक संभव लग रहा है जो निश्चित रूप से ईरान से सीधे टकराव की ओर जाएगा इसके लिए यमन भी एक मैदान हो सकता है। अगर ऐसा कुछ हुआ तो यह निश्चित है कि इसके भयानक परिणाम, ट्रम्प के वाइट हाउस में रहने तक ही सीमित नहीं रहेंगे बल्कि उससे बाद भी जारी रहेंगे और पूरा इलाक़ा उससे प्रभावित होगा।